दुर्ग। दुर्ग जिला न्यायालय में प्रैक्टिस करने वाली अधिवक्ता फरीहा अमीन कुरैशी के साथ एक बड़ी ऑनलाइन ठगी का मामला सामने आया है। ठगों ने खुद को दिल्ली पुलिस और सीबीआई अधिकारी बताकर उन्हें डिजिटल अरेस्ट (Digital Arrest) का डर दिखाया और 41 लाख रुपये ठग लिए।

महिला वकील ने दुर्ग कोतवाली थाने में शिकायत दर्ज कराई है। उन्होंने बताया कि दिल्ली के दो लोगों, दीपक और सुनील कुमार गौतम, ने वीडियो कॉल के जरिए खुद को दिल्ली पुलिस अधिकारी बताया और उन्हें धमकाया कि उनके नाम से एक संदिग्ध बैंक खाता मिला है, जिसमें 8.7 करोड़ रुपये का लेनदेन हुआ है।
कैसे हुई ठगी?
21 जनवरी 2025 की सुबह 10:35 बजे महिला वकील के फोन पर वीडियो कॉल आया। कॉल करने वाले ठगों ने कहा कि उन्होंने संदीप कुमार नाम के एक आरोपी को गिरफ्तार किया है, जो मनी लॉन्ड्रिंग, ड्रग तस्करी और पहचान की चोरी जैसे गंभीर अपराधों में शामिल है। उन्होंने दावा किया कि संदीप के पास से 180 संदिग्ध बैंक खाते मिले हैं, जिनमें से एक खाता महिला वकील के नाम पर भी दर्ज है।
इस खाते को 18 दिसंबर 2024 को दिल्ली स्थित एचडीएफसी बैंक में खोला गया था, और इसमें 8.7 करोड़ रुपये जमा किए गए थे। ठगों ने महिला वकील को डराया कि अगर उन्होंने तुरंत कार्रवाई नहीं की, तो सीबीआई उन्हें गिरफ्तार कर लेगी और कड़ी पूछताछ करेगी।
पहले मांगी जानकारी, फिर दिया गिरफ्तारी का डर
काल करने वालों ने पहले महिला वकील से आधार कार्ड, मोबाइल नंबर, जन्म तिथि और अन्य व्यक्तिगत जानकारी ली। इसके बाद उन्होंने बताया कि यही जानकारी उनके पास जब्त किए गए बैंक खाते से भी मिली है। इसके बाद उन्होंने महिला को दिल्ली आकर बयान देने के लिए कहा। जब महिला ने असमर्थता जताई तो उसे तत्काल गिरफ्तारी की धमकी दी गई।
हर दिन कॉल कर डराते रहे
महिला वकील ने बताया कि एक व्यक्ति, जिसने खुद को आईपीएस सुनील कुमार गौतम बताया, उनसे रोजाना सुबह 9:30 से 10:30 के बीच कॉल पर बात करता था। वह उन्हें डराने और गुमराह करने की कोशिश करता था। धीरे-धीरे महिला को इतना मानसिक दबाव बना दिया गया कि उन्होंने अपनी सारी बैंक जमा पूंजी यानी 41 लाख रुपये ठगों द्वारा बताए गए आरबीआई खाते में ट्रांसफर कर दिए। पैसे ट्रांसफर होते ही ठगों का फोन आना बंद हो गया।
फर्जी दस्तावेजों पर लगा अशोक स्तंभ देखकर भरोसा कर बैठीं
महिला वकील ने बताया कि कॉल करने वाले ठगों ने उन्हें सरकारी दस्तावेज भी भेजे, जिन पर अशोक स्तंभ और नीली स्याही की सरकारी मुहर लगी थी। यह देखकर उन्हें यकीन हो गया कि वे सच में पुलिस और सीबीआई अधिकारी ही हैं। लेकिन बाद में जब हकीकत सामने आई, तो उन्होंने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।
पुलिस कर रही मामले की जांच

दुर्ग कोतवाली पुलिस ने शिकायत दर्ज कर ली है और जांच शुरू कर दी है। साइबर पुलिस भी इस मामले में जुट गई है और यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि ये ठग कहां से काम कर रहे थे। पुलिस लोगों से अपील कर रही है कि वे इस तरह की ठगी से बचें और किसी भी संदिग्ध कॉल या धमकी मिलने पर तुरंत पुलिस को सूचित करें।


